Office Ki Real Love Story Hindi: ऑफिस की रियल लव स्टोरी हिंदी

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Real Office Hindi Love Story

Office Ki Love Story Hindi
ऑफिस की रियल लव स्टोरी हिंदी 

ह सब तब शुरू हुआ जब मैं 2013 में MCA फाइनल ईयर में थी। मैं कैंपस प्लेसमेंट की तैयारी कर रही थी। कई सॉफ्टवेयर कंपनी इंटरव्यू में पजल को भी सॉल्व करने के लिए कहते हैं, इसलिए मैं पज़ल्स को समझने के लिए कुछ वेबसाइटों को खोजती रहती थी।

लेकिन मैं पज़ल्स को सॉल्व करने में बिलकुल भी अच्छी नहीं थी, इसलिए मुझे पज़ल्स को समझने में ज्यादा टाइम लगता था, हालाँकि वेबसाइटों ने पज़ल्स को अच्छे से समझाया था और अच्छे कंटेंट उपलब्ध कराए थे।


फिर अचानक मैं वेबसाइट के कमेंट सेक्शन में देखी। "संजय अग्रवाल" नाम का एक आदमी है, जिसने कमेंट सेक्शन में पहेलियाँ बताई थी। वह पहेलियों को इतने अच्छे तरीके से समझाता था कि एक बच्चा भी समझ सकता था।


मुझे लगा  कि वह एक शिक्षक होगा, इसलिए मैंने उसे Google+ पर एक अनुरोध भेजा। उसने तुरंत ही मेरा रिप्लाई किया। फिर मैंने उससे पूछा कि क्या वह एक शिक्षक है?


उन्होंने बताया कि वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं जो सैमसंग आरएंडडी इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में काम करते हैं। संयोग से सैमसंग कंपनी एक सप्ताह के अन्दर मेरे कॉलेज में प्लेसमेंट्स के लिए आने वाला था।


इसलिए मैंने उनसे सैमसंग के इंटरव्यू पैटर्न और नीतियों के बारे में पूछा, जिसके लिए उन्होंने खुशी से मदद की।


लेकिन मैं सैमसंग के इंटरव्यू को क्लियर नहीं कर पाई। इसलिए मैंने उससे बात करना बंद कर दिया क्योंकि वह मेरे लिए एक अजनबी था और अब वैसे कोई बात करने की वजह भी नही थी।


लेकिन कुछ दिनों के बाद, सैमसंग से मुझे कॉल आया और मुझे बैंगलोर में छह महीने की इंटर्नशिप का ऑफर दिया गया। मेरे ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था और मैंने तुरंत ही प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। फिर से मैं और संजय सैमसंग और कॉलेज प्लेसमेंट के बारे में एक-दूसरे से बात करने लगे।


उस समय मुझे नहीं पता था कि संजय पहले से ही मेरी पिक्स को पसंद करते हैं और मेरे सपने देखने लगे हैं:


मैं भी उनकी सादगी और बुद्धिमत्ता से प्रभावित थी। वह कॉलेज टॉपर था। वह अपनी जॉब में भी अच्छा कर रहा था।


अंत में वह दिन आ गया जब मैंने अपनी चीजों को पैक किया और इंटर्नशिप के लिए बैंगलोर चली गयी। उस समय सैमसंग के बंगलौर में दो ऑफिस थे लेकिन नियति का खेल तो देखिये। मुझे वही ऑफिस मिला जिसमें संजय काम कर रहे थे।


जब उसने मुझे पहली बार देखा, तो उसने उसी क्षण मुझे पसंद कर लिया। और 1 महीने के भीतर उसने मुझे प्रोपोस किया।


मैं तब तक तैयार नहीं थी, न ही मैं संजय को दोस्त से ज्यादा मानती थी। लेकिन फिर भी हमने अपनी दोस्ती जारी रखी। हम सैमसंग में एक साथ लंच करते थे। हम बहुत घूमते थे। हम एक-दूसरे के साथ सब कुछ साझा करते हैं।


हालांकि हमारे व्यक्तित्व एक-दूसरे के विपरीत हैं। फिर भी हम एक-दूसरे को पम्पर करते रहते थे।


अंत में इंटर्नशिप खत्म हो गई और मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में किसी और कंपनी में शामिल हो गयी। संजय भी दूसरी कंपनी में चले गए।


उस समय हमने एक-दूसरे को बहुत मिस किया। हालांकि हम संपर्क में थे। मेरे परिवार ने भी मेरे लिए वर खोजना शुरू कर दिया। फिर भी, मैं और संजय रोज एक-दूसरे से बात करते थे और हम हर वीकेंड पर एक-दूसरे से मिलते थे।


फिर मेरे दिमाग में एक विचार कौंधा कि अगर मेरे होने वाले पति को इश तरह मेरा डेली संजय से बात करना पसंद नहीं आया तो। और संजय की होने वाली पत्नी  को भी ये सब ठीक नही लगा तो। क्या हम एक-दूसरे से बात करना बंद कर देंगे? क्या मैं उससे बात किए बिना रह पाऊंगी? क्या मैं उसे किसी और लड़की के साथ देख पाऊंगी।


तब मुझे उसके प्रति अपने प्यार का एहसास हुआ। और इस बार मैंने उसे प्रोपोस कर दिया।


अब हमारे रिश्ते को आगे बढ़ने के लिए कई बाधाएँ थीं। सबे पहले की, वह पूर्वी भारत से है जबकि मैं पश्चिम भारत से हूं। प्रेम विवाह के लिए परिवारों को समझाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। उनके बड़े भाई की शादी होनी बाकी थी, इसलिए वह अपने भाई की पहली शादी का इंतजार कर रहे थे, जबकि मेरे माता-पिता मुझे शादी करने के लिए मजबूर कर रहे थे। हमारी आर्थिक स्थिति भी वैसी नहीं थी।


लेकिन हमने एक-दूसरे से वादा किया कि चाहे जो भी हो, हम एक-दूसरे साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। और फिर धीरे-धीरे, हमने साथ मिल कर अपनी सारी बाधाओं को दूर किया। फिर क्या था, अगस्त 2015 में हमारी सगाई और  शादी दिसंबर 2015 में हुई।


हमारी शादी को 2 साल हो चुके हैं लेकिन फिर भी हम एक-दूसरे के लिए वैसा ही जुनून महसूस करते हैं। प्रत्येक बीतते दिन के साथ, हमारा प्यार तेजी से बढ़ रहा है।


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